कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती

"शिक्षा और राजनीति ही सफलता की कुंजी हैं, जिनसे हर समस्या का समाधान संभव है"

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श्री महावीर प्रसाद “छन्नपहाड़िया” जी

मार्गदर्शक टोली
कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती संगठन (रजि.)

परिचय

महावीर प्रसाद जी का जन्म 5 जून 1948, दिल्ली के करोल बाग में हुआ, जबकि उनके पूर्वज हरियाणा के रेवाड़ी जनपद से थे। छन्नपहाड़िया जी के पिताजी का नाम थाना राम और माताजी का नाम खिम्भो देवी था । प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के करोल बाग क्षेत्र में ही प्राप्त की, जहाँ से उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। वे बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे, जिसने उनके सामाजिक और राष्ट्रहित से जुड़ाव को मजबूत आधार प्रदान किया।


छन्नपहाड़िया जी ने खटीक समाज के उत्थान के लिए सतत प्रयास किए। वे खटीक समाज जन कल्याण परिषद में महामंत्री के पद पर कार्यरत रहे और समाज के हक और सम्मान के लिए विभिन्न आंदोलनों और जागरूकता अभियानों में भाग लिया। एक महत्वपूर्ण घटना के तहत जब मनोहर कहानियां पत्रिका में खटीक समाज के विरुद्ध असत्य लेख प्रकाशित हुआ, तो उन्होंने बाबा प्रभाती के नेतृत्व में तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। इस आंदोलन ने समाज में एकता, जागरूकता और आत्मसम्मान की भावना को और मजबूत किया।


महावीर प्रसाद जी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और दिल्ली की राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में उभरे। वे दिल्ली नगर निगम में करोल बाग ज़ोन से चेयरमैन पद पर निर्वाचित हुए और इस पद पर रहकर कई जनहित कार्यों को अंजाम दिया। उन्हें अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण बोर्ड का सदस्य भी नामित किया गया, जहाँ उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के हित में कार्य किए।

एक बार दिल्ली नगर निगम के चुनाव के दौरान, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी करोल बाग में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने आईं, तो महावीर प्रसाद जी ने शांतिपूर्ण ढंग से उनके वाहन के सामने लेटकर विरोध किया और कहा:
“यह चुनाव प्रधानमंत्री का नहीं, निगम का है। आप मेरी बुआ जैसी हैं, कृपया इस चुनाव में प्रचार न करें।”


इंदिरा गांधी उनके विनम्र आग्रह से प्रभावित होकर बिना प्रचार किए लौट गईं। परिणामस्वरूप, महावीर प्रसाद जी उस चुनाव में भारी बहुमत से विजयी रहे। 2002 में एक निगम चुनाव में वे सिर्फ एक वोट से जीते, और यह जीत कई प्रमुख समाचार पत्रों की सुर्खियों में रही।