
श्री मामचंद रिवाड़िया जी
मार्गदर्शक टोली
कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती संगठन (रजि.)
परिचय
7 जुलाई 1936 को पुरानी दिल्ली के चौक शाह मुबारिक, कूचा पातीराम, बाजार सीताराम (दिल्ली-6) में जन्मे मामचंद रिवाड़िया ऐसे चंद व्यक्तियों में से एक हैं, जिन्होंने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से साक्षात भेंट की और उनके विचारों को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाया। उनके पिता श्री भून्डेराम रिवाड़िया हौजकाजी में सब्जी-फल की दुकान चलाते थे और माता का नाम मिश्री देवी खैरवाल था।
चौथी कक्षा तक पढ़ने के बाद जब वे पिता की दुकान पर हाथ बंटा रहे थे, तब एक प्रिंसिपल श्री रूपलाल जी की पहल पर उनका दाखिला स्कूल में हुआ। लेकिन स्कूल जीवन आसान नहीं था। वे अपनी कक्षा में अकेले दलित छात्र थे और उन्हें जातिसूचक शब्दों से बुलाया जाता। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दिल्ली कॉलेज (अब ज़ाकिर हुसैन कॉलेज) से बी.ए. किया।
बचपन में अपने मित्र रतनलाल जाटव के साथ डॉ. अंबेडकर के दिल्ली निवास पर जाना, उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बना। बाबासाहेब से हुई मुलाकात और उनके विचारों ने मामचंद जी की दिशा ही बदल दी। बाद में उन्होंने बाबा प्रभाती जी जैसे समर्पित आंबेडकरवादी कार्यकर्ता के साथ वर्षों तक कार्य किया।
रिवाड़िया जी ने न सिर्फ समाज सेवा की, बल्कि साहित्यिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बाबा साहेब की सरल भाषा में जीवनी लिखी ताकि आमजन तक उनके विचार पहुँच सकें। उन्होंने संत दुर्बलनाथ और महात्मा चरणदास के जीवन पर भी किताबें लिखीं। साथ ही उन्होंने खटीक समाज के इतिहास पर भी शोध आधारित रचना की। उनके निरंतर सामाजिक योगदान के लिए उन्हें 26 जनवरी, 1997 को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। वे अब तक 17 देशों की यात्राएं कर चुके हैं और भारत में दलित चेतना को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने का कार्य भी किया है।