कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती

"शिक्षा और राजनीति ही सफलता की कुंजी हैं, जिनसे हर समस्या का समाधान संभव है"

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श्री होत्तम खितौलिया जी

सलाहकार
कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती संगठन (रजि.)

परिचय

होत्तम खितौलिया जी का जन्म 7 मई 1967 को उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव दीनपुर में एक निर्धन परिवार में हुआ। बाद में उनका पैतृक ग्राम रछुआ बना। उनके पिता का नाम बंशी लाल खटीक तथा माता का नाम अंगूरी देवी था। खितौलिया जी ने बी.कॉम. करने के बाद एम.बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। उनका विवाह गीता देवी से हुआ, जो बाबूलाल मलावलिया की सुपुत्री हैं।


शिक्षा के प्रति गहरी रुचि रखने वाले होत्तम जी ने बैंकिंग क्षेत्र को अपने सेवा माध्यम के रूप में चुना। जयपुर, जम्मू-कश्मीर, मुंबई जैसे स्थानों पर कार्य करते हुए उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण विभाग की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया। उन्होंने ग्रामीण जनता को बैंकिंग की समस्त सुविधाओं की जानकारी देकर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।


उनकी सेवाओं और समर्पण के चलते उन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक में महाप्रबंधक के पद तक पदोन्नति मिली और उन्होंने उसी पद से सेवानिवृत्ति ली। इसके बाद उन्हें बैंकिंग लोकपाल के रूप में नियुक्त किया गया, जो उनके लिए और समाज के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण था। 


बाल्यकाल में जब वे कक्षा छठी में थे, तब उनके सहपाठी मनीराम पहाड़िया के माध्यम से उनकी मुलाकात बाबा प्रभाती से हुई। बाबा प्रभाती उन्हें अक्सर डॉ. भीमराव अंबेडकर की ओर इशारा करते हुए शिक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश देते थे, जिसे होत्तम जी ने जीवन भर स्मरण रखा और उसी मार्ग पर चलकर सफलता प्राप्त की।