कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती

"शिक्षा और राजनीति ही सफलता की कुंजी हैं, जिनसे हर समस्या का समाधान संभव है"

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श्री धारा सिंह खितौलिया जी

कोषाध्यक्ष
कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती संगठन (रजि.)

परिचय

जब समाज की सेवा की बात आती है, तो कुछ नाम ऐसे होते हैं जो न केवल प्रेरणा बनते हैं, बल्कि एक मार्गदर्शक की तरह अपने कर्मों से समाज को दिशा भी देते हैं। धारा सिंह खितौलिया जी उन्हीं चुनिंदा व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिन्होंने अपने जीवन को निःस्वार्थ सेवा और सामाजिक जागरूकता को समर्पित कर दिया। धारा सिंह जी खटीक समाज के ऐसे स्तंभ हैं जो सदैव पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को ऊपर उठाने के लिए तत्पर रहते हैं। जीवन की कठिनाइयों से कभी हार न मानते हुए, उन्होंने समाज के प्रत्येक तबके के लिए वह किया, जो बड़े-बड़े संगठन और संस्थाएं भी नहीं कर पातीं। चाहे किसी की नौकरी की बात हो या किसी जरूरतमंद तक सहायता पहुँचाना — धारा सिंह जी ने बिना किसी प्रचार या स्वार्थ के हर कार्य को सेवा का माध्यम माना।


उनका जन्म 1 दिसंबर 1968 को उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव दीनपुर में हुआ। बाद में उनके पिताजी रछुआ चले आए। उनके पिता बाबूलाल खितौलिया और माता कस्तूरी देवी, दोनों धार्मिक प्रवृत्ति के सरल, विनम्र और कर्मठ जन थे। धारा सिंह जी चार भाई-बहनों में से एक हैं। उनका विवाह श्री किंदूरी लाल चेतीवाल की सुपुत्री अनिता जी से हुआ, जो आज उनके सामाजिक कार्यों में सहभागी और सहयोगिनी भी हैं।


शैक्षिक रूप से भले ही वे केवल 12वीं तक शिक्षित हैं, लेकिन उनका व्यावहारिक ज्ञान, दूरदृष्टि और नेतृत्व क्षमता ने समाज में उन्हें एक विशेष स्थान दिलाया है। आज वे भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन NIC (नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर) में कार्यरत हैं, और अपने कार्यालय में भी एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते हैं। धर्म, साधना और सामाजिक चेतना के पथ पर उन्होंने कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती जी से गहरा प्रभाव ग्रहण किया। बाबा जी उन्हें स्नेह से “धारा लल्लू” कहा करते थे। बाबा प्रभाती जी के सान्निध्य में उन्होंने विपश्यना शिविरों में भाग लेकर आत्मज्ञान और सामाजिक कर्तव्यों का गहन अभ्यास किया।


वर्तमान में धारा सिंह जी संत देवगिरी बागरेन आश्रम के संरक्षक, खटीक समाज सामूहिक विवाह समिति के सचिव सहित कई संगठनों में सक्रिय हैं। पूर्व में स्वदेशी जागरण मंच और भरतृरी आश्रम, अलवर तिराहा में भी उन्होंने सचिव के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है। विशेष रूप से, उन्होंने अब तक लगभग 15 लोगों को रोजगार दिलाने में मदद की है – यह एक असाधारण उपलब्धि है। 


कोरोना महामारी के कठिन समय में, उन्होंने अपनी निजी पूंजी से राशन किट, आयुर्वेदिक काढ़ा और जड़ी-बूटी युक्त तेल का घर-घर जाकर निःशुल्क वितरण किया। यह कार्य न केवल सेवा का उदाहरण था, बल्कि समाज के लिए एक सच्चा संदेश भी था कि जहां सरकारें नहीं पहुँच पातीं, वहां समाज के अपने लोग ही फरिश्ते बनकर सामने आते हैं।