खटीक (Khatik) समाज भारत की एक महत्वपूर्ण जाति है, जिसका इतिहास प्राचीन काल से वर्तमान तक विविधताओं से भरा हुआ है। यह समुदाय मुख्यतः उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में व्यापक रूप से फैला हुआ है。

khatik history 1 Baba Prabhati

मूल और उत्पत्ति:

‘खटीक’ शब्द संस्कृत के ‘खटिका’ या ‘खटिक’ से व्युत्पन्न माना जाता है, जिसका अर्थ शिकारी या कसाई होता है। ऐतिहासिक रूप से, खटीक समाज का मुख्य कार्य यज्ञों में पशु बलि देना था। पुराणों में ‘खटक ब्राह्मणों’ का उल्लेख मिलता है, जो यज्ञों में पशु बलि प्रदान करते थे, और जिनके द्वारा दी गई बलि ही स्वीकार्य मानी जाती थी。 समय के साथ, समाज में बदलाव के कारण खटीक समुदाय ने विभिन्न व्यवसायों को अपनाया।​

वर्तमान स्थिति:

आधुनिक समय में, खटीक समाज के लोग विभिन्न व्यवसायों और क्षेत्रों में सक्रिय हैं। शिक्षा, राजनीति, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में समाज के सदस्यों ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। विभिन्न राज्यों में खटीक समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, और वे समाज के विकास में योगदान दे रहे हैं।​

वर्गीकरण और सामाजिक स्थिति:

विभिन्न राज्यों में खटीक समुदाय की सामाजिक स्थिति अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली में इन्हें अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि गुजरात, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत रखा गया है。 ​

संस्कृति और परंपराएँ:

खटीक समाज की संस्कृति और परंपराएँ उनके ऐतिहासिक पेशों और धार्मिक मान्यताओं से प्रभावित रही हैं। समय के साथ, समाज ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हुए आधुनिकता को भी अपनाया है।